यह एकांकी लोकगीत है जो मैथिली संस्कृति का प्रतिबिंब हैं. इसमें बड़ा प्रेम कोई चित्रण मिलता हैं. यह भाषा बुआ और पोते के रिश्ते को होता है. इस गीत में सभी मनुष्य की कल्पना को बहुत खूबसूरती से होता है. यह भाषा सभी उम्र के लोगों को खुशी देता हैं. मैथिली पारंपरिक विवाह संगीत: अ
अभिनंदन रघुवर आयो जी
पंथिया मधुर में उसका प्रवेशनिर्धारित एक नये युग का। देश की आशाओं उसके साथ, शुभकामनाएं । प्रजातियों का मूल , वह अपने विश्वास में गौरवान्वित । आजादी का दिन, वह समर्थन में शक्ति । मैथिली प्रेमगाथा: अलबेला रघुवर यह
अलबेला रघुवर आयो जी
यह एकांकी लोकगीत होता है जो मैथिली संस्कृति का प्रतिबिंब है. इसमें अनगिनत भावना जो विवरण मिलता है. यह गीत बुआ और बापू के प्यार को होता है. इस गीत में हर इंसान की कल्पना को बेहद खूबसूरती से हैं. यह लोकगीत अलग-अलग उम्र के लोगों को आनंद देता है. मैथिली पारंपरिक विवाह गीत: अल